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Iran War : Ceasefire to Peace

  ईरान युद्ध - सीजफायर या स्थायी शान्ति ?                                               सिद्धार्थ शर्मा  https://www.youtube.com/live/7LlV_iwtuXs?si=_VWewLhjaB-woS8y https://www.facebook.com/share/v/1GMzNP1jLE/       हर व्यक्ति की एक सोच होती है और वो अपनी सोच को सही साबित करने की कवायद करता रहता है। व्यक्ति के जैसे ही समूहों की भी सोच होती है। वो अलग अलग होती है। देश काल परिस्थिति के अनुसार एक सोच धीरे धीरे किसी एक भूगोल में धीरे धीरे सभ्यता बन कर स्थापित हो जाती है।        मध्य पूर्व एक ऐसा स्थान है जहां दुनिया की तीन सोचें एक ही छोटी सी जगह पर मिलती है। 10 करोड फारस के लोग जो आदिवासियों की तरह प्रकृति प्रधान हैं और अपने संसाधन की रक्षा करते हैं। ये इरान है। 10 करोड रेगिस्तान की सोच जो जहां हरियाली मिले वहां जाते हैं, और सूख जाए तो तंबू उठा के नई हरियाली खोजने निकल जाते है।  खाड़ी के देश और इजराइल इस श्रेणी में आते हैं। तीस...

Trump sandwiching India ?

  गुरुघंटाल ट्रम्प के सामने  विश्वगुरु ब्रांड मोदी कहाँ गुम ?                                                                                     - -सिद्धार्थ शर्मा       ट्र म्प 2.0 को आये एक साल होने को आया।  इस एक साल में अमेरिका दुनिया का दादा, चीन उसका चैलेंजर और रूस उसको धता बतानेवाला दिख रहा है। नरेंद्र मोदी के विश्वगुरु  के डंके की लंका ट्रम्प ने ऑपरेशन सिन्दूर के सीजफायर का श्रेय लेकर लगा दी। उससे पहले और बाद में हिन्दुस्तानियों को बेड़ियों में भेजने से लेकर व्यापार वार्तालाप की विफलता और टैरिफ युद्ध, रूस से सस्ता तेल लेना बंद करने तक के सफर ने विश्वगुरु की छवि को तितर बितर कर दिया।       आक्रामक अमेरिका और विस्तारवादी रूस-चीन के बीच झूलते विश्व में भारत के सामने क्या विकल्प है, ये जानने से पहले बाक़...

Acharya Tulsi's Anuvrat Magazine @70 Article

  दक्षिण का ऋषितर्पण ------                                                                     -सिद्धार्थ शर्मा, बेंगळूरु       आदिकाल से ही मानव मन में एक द्वंद्व चल रहा है।  समाज निर्माण की भूमिका क्या हो ? दो विकल्प सामने आये -एक भौतिक विकास का, दूसरा आध्यात्मिक उन्नति का।  कुछ संस्कृतियों ने भौतिक मार्ग चुना, जिसमें भी दो रास्ते थे -सामाजिक उन्नति या व्यक्तिगत उन्नति।  सामाजिक उन्नति के पक्षधरों का मानना था कि समाज अगर उन्नति करता है, तो व्यक्ति की उन्नति उसमें स्व-निहित होगी।  इस विचारधारा से साम्यवाद पनपा -जिसमें ध्येय की प्राप्ति के लिए हिंसा मान्य थी।        भौतिक उत्कर्ष के लिए प्रयासरत दूसरी जमात ने यह सिद्धांत प्रतिपादित किया की समाज चूंकि व्यक्तियों का ही समूह है, अतः व्यक्ति के विकास से प्रकारांतर में समाज का विकास हो...

ELEGY Sepulchral

मुमुक्षा = Power Decentralization G uardians O f D ecentralization's   E ndless Z eal आदि शंकराचार्य ने हर चैतन्य के 5 चरित्र बताए 1. सत् = न मरने की इच्छा 2. चित् = नया ज्ञान हासिल की इच्छा 3. आनंद = सुख की इच्छा 4. मुमुक्षा = स्वतंत्र होने की इच्छा 5. ऐषणा = दूसरे पर प्र ​ भाव डालने की इच्छा     पहला सत् या जीवन -लंबे समय तक सभी मनुष्यों को प्राप्त नहीं था क्योंकि समाज में मत्स्य न्याय के चलते ताकतवर कमजोरों को मार देते थे, जैसे राक्षस या हिटलर मारते थे । समय के साथ आज अपवादों को छोड दें तो औसत मानवता को सत् मिल गया है, जीवन जीने का हक़ मिल गया है।     दूसरा चित् या ज्ञान भी लंबे समय तक लोगों को उपलब्ध नहीं था, समाज में कुछ ही लोग गुरु होते थे, बाकी सब जानकारी हेतु गुरु पर निर्भर। पहले 15 वीं सदी में प्रिंटिंग प्रेस के चलते और आज सूचना क्रांति के बाद ज्ञान सर्वसुलभ हो गया है, हर किसी के फोन में दुनिया भर का ज्ञान मौजूद है।     तीसरा, आनंद के लिए भौतिक वस्तुओं की, धन की जरूरत होती थी, पर दास प्रथा आदि के चलते बडी आबादी दरिद्र होती थी। 21वीं सदी आते आते...