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Lucifer's Wish

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Does Beelzebub Ever Wish Good ?      Satan is God’s son/servant –his unfiltered raw version. Good Bad & Ugly rolled into one. Man's mirror image. Never initiates contact, but is usually the first responder.      Once under his spell of a favor, there is no option to walk out or exorcise him, since we got into it consciously. The spell-bound have two choices. Beat Satan by being the best, or compete with him by being the worst. To those he likes, he nudges them to be the best version of themselves.      If choice is former, the challenger becomes God’s peer –Godesque. If challenger chooses latter, sinning remains the only way to winning -thereby giving God perpetual job of a judge.      Either way Satan ensures God has company, a thriving business and fun. Everything remains in the family having huge respect.  https://en.wikipedia.org/wiki/Lucifer_(TV_series) https://x.com/i/grok/share/53a07d2e64d647c087b271e6aa98a41c

The Architecture of Eclipses

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      The Architecture of Eclipses T here is a distinct, unwritten law governing the intersection of two wandering souls: they rarely meet when their lives are perfectly still. They catch each other either in mid-flight or mid-fall. A generation and countless years ago, Seo-jun’s world was a roaring, crowded royal court on the Korean peninsula. He had climbed his respective mountains, accumulated the heavy architecture of state success, and found himself standing under the blinding, suffocating spotlights of public scrutiny. Every day was a match played under immense pressure; every word spoken was weighed by spectators and ministers. In the middle of that noisy brilliance, the Royal Astronomer was secretly starving for raw spontaneity. Then came Matteo. He was a brilliant young Cartographer from the Mediterranean, carrying maps of trade routes and uncharted waters. To Seo-jun, the young foreigner was a celestial godsend. When he entered Seo-jun's orbit, Matteo was ...

Behaviour of Civilizations

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                                                                                      चुनाव बाद हिंसा के कारण       पांच राज्यों में चुनाव हुए। भारत के करीब दस प्रतिशत लोगों ने वोट डाले।  तीन राज्यों में सरकार बदली। जिन 14 करोड़ लोगों ने वोट डाला उसमें 8 करोड़ वोट क्षेत्रीय दलों को पड़े। सर्वाधिक 8 करोड़ वोट के बावजूद क्षेत्रीय दल एक ही राज्य में सरकार बनाएंगे। सबसे कम 2 करोड़ वोट वाली कांग्रेस भी एक राज्य में सरकार बना लेगी और दूसरे  नंबर पर 4 करोड़ वोट वाली भाजपा 3 राज्यों में सरकार बना लेगी।        5 में से 2 राज्यों में जीतनेवाले नए दल ने लोगों का शुक्रिया अदा किया, नई सरकार बनाने की कवायद शुरू की।  एक राज्य में जीत के जश्न ने हिंसक रूप लिया।  लोगों से लेकर विपक्ष तक के साथ अभद्रता और गुंडई का बोलबाला दिखा।  ...

Iran War : Ceasefire to Peace

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  ईरान युद्ध - सीजफायर या स्थायी शान्ति ?                                               सिद्धार्थ शर्मा  https://www.youtube.com/live/7LlV_iwtuXs?si=_VWewLhjaB-woS8y https://www.facebook.com/share/v/1GMzNP1jLE/       हर व्यक्ति की एक सोच होती है और वो अपनी सोच को सही साबित करने की कवायद करता रहता है। व्यक्ति के जैसे ही समूहों की भी सोच होती है। वो अलग अलग होती है। देश काल परिस्थिति के अनुसार एक सोच धीरे धीरे किसी एक भूगोल में धीरे धीरे सभ्यता बन कर स्थापित हो जाती है।        मध्य पूर्व एक ऐसा स्थान है जहां दुनिया की तीन सोचें एक ही छोटी सी जगह पर मिलती है। 10 करोड फारस के लोग जो आदिवासियों की तरह प्रकृति प्रधान हैं और अपने संसाधन की रक्षा करते हैं। ये इरान है। 10 करोड रेगिस्तान की सोच जो जहां हरियाली मिले वहां जाते हैं, और सूख जाए तो तंबू उठा के नई हरियाली खोजने निकल जाते है।  खाड़ी के देश और इजराइल इस श्रेणी में आते हैं। तीस...

Trump sandwiching India ?

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  गुरुघंटाल ट्रम्प के सामने  विश्वगुरु ब्रांड मोदी कहाँ गुम ?                                                                                     - -सिद्धार्थ शर्मा       ट्र म्प 2.0 को आये एक साल होने को आया।  इस एक साल में अमेरिका दुनिया का दादा, चीन उसका चैलेंजर और रूस उसको धता बतानेवाला दिख रहा है। नरेंद्र मोदी के विश्वगुरु  के डंके की लंका ट्रम्प ने ऑपरेशन सिन्दूर के सीजफायर का श्रेय लेकर लगा दी। उससे पहले और बाद में हिन्दुस्तानियों को बेड़ियों में भेजने से लेकर व्यापार वार्तालाप की विफलता और टैरिफ युद्ध, रूस से सस्ता तेल लेना बंद करने तक के सफर ने विश्वगुरु की छवि को तितर बितर कर दिया।       आक्रामक अमेरिका और विस्तारवादी रूस-चीन के बीच झूलते विश्व में भारत के सामने क्या विकल्प है, ये जानने से पहले बाक़...

Acharya Tulsi's Anuvrat Magazine @70 Article

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  दक्षिण का ऋषितर्पण ------                                                                     -सिद्धार्थ शर्मा, बेंगळूरु       आदिकाल से ही मानव मन में एक द्वंद्व चल रहा है।  समाज निर्माण की भूमिका क्या हो ? दो विकल्प सामने आये -एक भौतिक विकास का, दूसरा आध्यात्मिक उन्नति का।  कुछ संस्कृतियों ने भौतिक मार्ग चुना, जिसमें भी दो रास्ते थे -सामाजिक उन्नति या व्यक्तिगत उन्नति।  सामाजिक उन्नति के पक्षधरों का मानना था कि समाज अगर उन्नति करता है, तो व्यक्ति की उन्नति उसमें स्व-निहित होगी।  इस विचारधारा से साम्यवाद पनपा -जिसमें ध्येय की प्राप्ति के लिए हिंसा मान्य थी।        भौतिक उत्कर्ष के लिए प्रयासरत दूसरी जमात ने यह सिद्धांत प्रतिपादित किया की समाज चूंकि व्यक्तियों का ही समूह है, अतः व्यक्ति के विकास से प्रकारांतर में समाज का विकास हो...

Epitaph | मुमुक्षा = Power Decentralization

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मुमुक्षा = Power Decentralization आदि शंकराचार्य ने हर चैतन्य के 5 चरित्र बताए 1. सत् = न मरने की इच्छा 2. चित् = नया ज्ञान हासिल की इच्छा 3. आनंद = सुख की इच्छा 4. मुमुक्षा = स्वतंत्र होने की इच्छा 5. ऐषणा = दूसरे पर प्र ​ भाव डालने की इच्छा     पहला सत् या जीवन -लंबे समय तक सभी मनुष्यों को प्राप्त नहीं था क्योंकि समाज में मत्स्य न्याय के चलते ताकतवर कमजोरों को मार देते थे, जैसे राक्षस या हिटलर मारते थे । समय के साथ आज अपवादों को छोड दें तो औसत मानवता को सत् मिल गया है, जीवन जीने का हक़ मिल गया है।     दूसरा चित् या ज्ञान भी लंबे समय तक लोगों को उपलब्ध नहीं था, समाज में कुछ ही लोग गुरु होते थे, बाकी सब जानकारी हेतु गुरु पर निर्भर। पहले 15 वीं सदी में प्रिंटिंग प्रेस के चलते और आज सूचना क्रांति के बाद ज्ञान सर्वसुलभ हो गया है, हर किसी के फोन में दुनिया भर का ज्ञान मौजूद है।     तीसरा, आनंद के लिए भौतिक वस्तुओं की, धन की जरूरत होती थी, पर दास प्रथा आदि के चलते बडी आबादी दरिद्र होती थी। 21वीं सदी आते आते दरिद्रता अपवाद रह गई है और बेसिक आनंद के लिए आवश्यक धन क...