Skip to main content

Posts

Showing posts from January, 2016

Republic Day

गण की बात       स्वतंत्रता और उच्श्रृंखलता के बीच एक अस्पष्ट सीमा रेखा होती है। इस सीमा रेखा के भीतर का आचरण व्यक्ति की स्वतंत्रता मानी जाती है और उसका उल्लंघन उच्श्रृंखलता मानी जाती है। सीमा रेखा के अंदर का व्यवहार व्यक्ति के मौलिक अधिकार होते है और सीमा रेखा से बाहर का व्यवहार अनुशासन हीनता या अपराध। स्वयं विकसित, दीर्धकालिक, नियम पालन से प्रतिबद्ध व्यक्तियों के समूह को समाज कहते है। इस तरह ऐसी स्वनिर्मित सीमा रेखा का पालन सबके लिये अनिवार्य है, चाहे वह व्यक्ति हो, परिवार हो, सरकार हो या स्वयं समाज ही क्यो न हो। यह सीमा रेखा अस्पष्ट है, अघोशित है किन्तु अपरिवर्तन शील है। अर्थात इस सीमा रेखा में परिस्थिति अनुसार अल्पकाल के लिये व्यावहारिक संशोधन तो हो सकते हैं किन्तु बदलाव नहीं। इसका अर्थ हुआ कि राज्य भी ऐसी सीमा रेखा में न कोई बदलाव कर सकता है न अतिक्रमण।      व्यक्ति सीमा रेखा के बाहर जाने से स्वतः अपने को रोक लेता है तो उसे स्वशासन कहते हैं। किन्तु यदि ऐसा व्यक्ति स्वतः को नहीं रोक पाता और परिवार या समाज के भय से रुकता है उसे अनुशासन क...