Behaviour of Civilizations

                                                                                  

चुनाव बाद हिंसा के कारण 


     पांच राज्यों में चुनाव हुए। भारत के करीब दस प्रतिशत लोगों ने वोट डाले।  तीन राज्यों में सरकार बदली। जिन 14 करोड़ लोगों ने वोट डाला उसमें 8 करोड़ वोट क्षेत्रीय दलों को पड़े। सर्वाधिक 8 करोड़ वोट के बावजूद क्षेत्रीय दल एक ही राज्य में सरकार बनाएंगे। सबसे कम 2 करोड़ वोट वाली कांग्रेस भी एक राज्य में सरकार बना लेगी और दूसरे  नंबर पर 4 करोड़ वोट वाली भाजपा 3 राज्यों में सरकार बना लेगी।  

     5 में से 2 राज्यों में जीतनेवाले नए दल ने लोगों का शुक्रिया अदा किया, नई सरकार बनाने की कवायद शुरू की।  एक राज्य में जीत के जश्न ने हिंसक रूप लिया।  लोगों से लेकर विपक्ष तक के साथ अभद्रता और गुंडई का बोलबाला दिखा।  संस्कृति की विकृति सामने आई। 

     ईरान युद्ध और ट्रम्प के सभ्यता को विनाश करनेवाली घोषणा के बाद से सभ्यता शब्द चर्चा में आ गया है।  दुनिया भार में अलग अलग सभ्यताएं हैं।  फारस प्रकृतिवादी सभ्यता है इसीलिए होर्मुज की प्रकृति को पकडे हुए है।  पश्चिम की सभ्यता भौतिक है तो भौतिक हथियारों से प्राकृतिक तेल को हिंसा से जीतने की जिद्द में है।  रेगिस्तानी सभ्यता जहां हरियाली वहां कारवाँ लेकर चल देती है -इसीलिए खाड़ी के देश में कुछ अमेरिका के साथ तो कुछ ईरान के झूलते दिखते हैं। 

     भारत की भी अपनी सभ्यता है।  सभ्यताएं धर्म और राजनीति से पुरानी और व्यक्ति से बड़ी होती हैं।  पहले सभ्यता बनती है, उसमें से धर्म, सत्ता, व्यक्ति निकलते भी है और उसीमें विलीन भी हो जाते है। भारत की भी सभ्यता बहुत पुरानी है।   इस सभ्यता से कई धर्म, बहुत सारी सत्ताएं और सैकड़ों पीढ़ियां पैदा भी हुई और विलीन भी।  पिछले 800 साल में भारत पर इस्लाम, ईसाई और हिन्दू सत्ताएं रहीं -फिर भी भारतीय सभ्यता अपने स्थान पर स्थित है।  

     मतलब सभ्यता, संस्कृति जैसी चीजें इतनी बड़ी होती हैं कोई उसे बचाने की औकात नहीं रखता।  बस सभ्यता के अनुसार व्यवहार या तो किया जाता है, या तो विपरीत।   ईरान ने अपनी सभ्यता के अनुसार आचरण किया, होर्मुज नाम की प्रकृति के इर्द गिर्द अपना आचरण रखा तो बाहरी भौतिक सभ्यता के हमले तक को आराम से निपट दिया।  ईरान ने अपनी सभ्यता को बचाने का काम नहीं किया।  बस अपनी सभ्यता के अनुसार आचरण किया। सभ्यता या संस्कृति क्योंकि धर्म और राज्य सत्ता से प्राचीन होती हैं, इसीलिए किसी भूभाग में लंबे समय तक टिके रहने हेतु हर सभ्यता एक जीवनशैली अपनाती है और इसी कारण हजारों सालों तक अलग अलग सत्ताओं के बावजूद मूल चरित्र बनाए रखने के चलते अस्तित्व बनाये रखती हैं।  

     भारतीय उपमहाद्वीप को यदि हिंदू सभ्यता मानें तो हिंदू अर्थात क्या?  मूलतः आरण्यक सभ्यता होने के चलते भारत की सभ्यता अहिंसक है, जियो और जीने दो वाली है। आचार्य विनोबा भावे ने बृहस्पति आगम के अनुसार बताया की "हिंसया दूयते चित्तं तेन हिन्दु रि तीरितः" -इसका अर्थ है: जिसका मन हिंसा को देखकर दुखी होता है, वही 'हिन्दू' कहलाता है।  ऐसी संस्कृति जो पेड पौधे जानवर आदि तक को देव माने -वो सारी चीजें जिन्हें दुनिया की दूसरी सभ्यताएं भोजन मानकर खा लेती हैं, उन सब वस्तुओं को भारत पूज्य मानता है। 

     दुनिया जिसे खाती है, भारत यदि उसे पूजता है, मतलब भारत किसी विषय का निष्कर्ष दुनिया भर के प्रचार से प्रभावित होकर नहीं, बल्कि मौलिक विचार करके पहुँचता है ये सिद्ध हुआ। इसीलिए विश्व को प्राचीन भारत ने शून्य दिया, पाई दिया, ग्राम गणराज्य दिया, अहिंसा दी। सब मौलिक। दुनिया में पहली बार, पूरी तरह से नायाब। भारतीय होना यानी अपना विशिष्ट स्वतंत्र परिचय होना, सूर्य के तरह स्वयंप्रकाशी, चांद की तरह अन्य के प्रकाश पर निर्भर नहीं। 

     इस भारतीय सभ्यता में पिछले तीन दशकों की एक पीढ़ी ने एक नया आयाम जोड़ा है।  वैश्विक आवागमन सुलभ होने के चलते भारत के करीब 30 करोड़ परिवारों में से 3 करोड़ परिवारों से एक व्यक्ति भारत से बाहर भौतिकवादी सभ्यता के पाश्चात्य देशों में रहने लगा है।  वो 3 करोड़ लोग सालाना करीब 12 करोड़ रुपये भारत भेजते हैं -जो की भारत सरकार के 36 करोड़ बजट का 1/3 है।  मतलब पिछली एक पीढ़ी में औसत भारत की भौतिकवाद पर निर्भरता बढ़ी है। अपने खुद की प्राचीन अहिंसक सहयोगी सभ्यता से गए हुए लोग अब वहां के नवीन पाश्चात्य भौतिक हिंसक सभ्यता से रूबरू भी हुए हैं और उस सभ्यता के अंशों को भारत भेज भी रहे हैं -विकास, उपभोक्तावाद, हिंसा पर विश्वास आदि के रूप में। 

     वर्तमान भारतीय सभ्यता एक रोचक मोड़ पर खड़ी है जहां 10 में से 7 भारतीय अपनी प्राचीन विकेन्द्रीकृत, मौलिक विचार और अहिंसक संस्कृति के अनुसार आचरण कर रहे हैं जबकि 10 में से 3 हिन्दुस्तानी आधुनिक दूसरी सभ्यताओं से प्रभावित होकर केंद्रीकृत, प्रचार आधारित, जिसकी लाठी उसकी भैंस के आधार पर आचरण कर रहे हैं। 

     और वर्तमान भारत ने क्योंकि संख्यासुर नाम के संसदीय बहुमत का शासन मॉडल अपनाया है, तो उसमें 51 = 100 और 49 = 00 के आधार पर सरकारें सत्ता में आ-जा रही हैं। ये ऊँट अंततोगत्वा किस करवट बैठेगा, प्राचीन भारतीय दार्शनिक सभ्यता के अनुरूप, या आधुनिक पाश्चात्य भौतिक सभ्यता के करवट, ये कहना अभी मुश्किल है।

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